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Raigarh. रायगढ़। जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण केलो डैम का जलस्तर बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने मंगलवार को डैम के छह गेट खोल दिए। गेट खोले जाने के साथ ही केलो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और शहर का महत्वपूर्ण चक्रपथ मार्ग पानी में डूब गया। कुछ ही समय में चक्रपथ पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया, जिसके बाद शहर के दूसरे प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। चक्रपथ जलमग्न होने के बाद बड़ी संख्या में वाहनों को चक्रधर नगर रोड और कलेक्ट्रेट की तरफ जाने वाले ओवरब्रिज से निकाला जाने लगा। सामान्य दिनों की तुलना में इन दोनों मार्गों पर अचानक कई गुना अधिक वाहन पहुंच गए। इसके कारण कार, बस, पिकअप, ऑटो और सैकड़ों दोपहिया वाहन एक-दूसरे के पीछे फंस गए। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं मिली।
सबसे अधिक परेशानी स्कूल से बच्चों को लेकर लौट रही बसों को हुई। भीषण जाम के बीच कई स्कूली बसें लंबे समय तक फंसी रहीं। बसों में बैठे बच्चे जाम खुलने का इंतजार करते रहे। अभिभावक भी बच्चों के समय पर घर नहीं पहुंचने के कारण परेशान हुए। वैकल्पिक मार्गों पर पहले से यातायात व्यवस्था नहीं होने के कारण स्कूल बसों को निकालने में काफी समय लगा। इसी बीच मरीज को लेकर जा रही एक एंबुलेंस भी जाम की चपेट में आ गई। सड़क पर वाहनों की कतार और पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण एंबुलेंस को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल पाया। एंबुलेंस में मरीज होने की जानकारी मिलने के बाद आसपास मौजूद लोगों ने स्वयं वाहनों को किनारे कराने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद एंबुलेंस के लिए रास्ता बनाया जा सका।
चक्रपथ शहर में यातायात का दबाव कम करने वाला प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग के बंद होने से पूरा दबाव चक्रधर नगर, कलेक्ट्रेट ओवरब्रिज और रेलवे फाटक के आसपास पहुंच गया। अचानक बढ़े यातायात के कारण प्रमुख चौक-चौराहों पर भी अव्यवस्था की स्थिति बन गई। कार्यालय, स्कूल, बाजार और अन्य आवश्यक काम से निकले लोगों को लंबे समय तक जाम में खड़ा रहना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन और यातायात विभाग के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि भारी बारिश और केलो डैम में बढ़ते जलभराव को देखते हुए गेट खोलने की स्थिति का पहले से अनुमान लगाया जा सकता था। डैम के गेट खुलने के बाद केलो नदी का जलस्तर बढ़ना और चक्रपथ पर पानी भरना भी संभावित स्थिति थी।
लोगों ने सवाल उठाया कि चक्रपथ के बंद होने पर वैकल्पिक मार्गों में बढ़ने वाले दबाव को ध्यान में रखते हुए पहले से यातायात डायवर्जन योजना क्यों तैयार नहीं की गई। संवेदनशील चौक-चौराहों, ओवरब्रिज और रेलवे फाटक के पास अतिरिक्त यातायात पुलिस की तैनाती समय रहते की जाती तो जाम की स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता था। यदि डैम के गेट खोलने की सूचना यातायात विभाग को पहले ही मिल गई थी तो चक्रधर नगर रोड और कलेक्ट्रेट ओवरब्रिज पर अतिरिक्त बल तैनात नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, यदि यातायात पुलिस को समय पर सूचना नहीं दी गई तो यह अलग-अलग विभागों के बीच प्रशासनिक समन्वय की कमी को दर्शाता है। दोनों ही परिस्थितियों में परेशानी का सामना आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को करना पड़ा।
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